योगी आनंद द्वारा भगवती दुर्गा की प्रार्थना

हे माते! तू सर्वज्ञ है क्योंकि सबके भीतर स्थित आत्मा है तू। तेरी सत्ता चहुंओर और अनंत है। तू ब्रह्मा में रचनात्मक शक्ति, विष्णु में पालन-पोषण की शक्ति, एवं शिव में संहारक शक्ति के रूप में स्थित है। तेरे अनंत नाम व रूप हैं। शब्द, चेतना, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, छाया, शक्ति, तृष्णा, क्षान्ति (सहिष्णुता), जाति, … Continue reading योगी आनंद द्वारा भगवती दुर्गा की प्रार्थना

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Adwaita अद्वैत (Non-duality)

Om! I would like to express my view on the profound subject - ADVAITA. Advvaita (Non-duality) is the Ultimate Reality, there, where, only One exists but not two, is Advaita. All kinds of Yoga - Bhakti Yoga, Jnana Yoga, Raja Yoga, Hatha Yoga, Karma Yoga, Laya Yoga, etc., have this destination. So long two exists, … Continue reading Adwaita अद्वैत (Non-duality)