न हि कम्मं विनस्सति Karma is never destroyed

Once Buddha said, "न हि कम्मं विनस्सति Karma is never destroyed". He meant that Karma is never destroyed, it produces the effects unerringly, and a doer has to undergo the good or bad effects of Karma inevitably. He gave his own example of getting abused by a person named Chincha, a big piece of stone … Continue reading न हि कम्मं विनस्सति Karma is never destroyed

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पातंजल योग सूत्र, साधन पाद

पातंजल योग सूत्र, साधन पाद अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः ।।३ ।। अर्थ: अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष एवं अभिनिवेश – ये क्लेश हैं। व्याख्या: यहाँ पर पाँच प्रकार के क्लेश बताये गये हैं – (1) अविद्या से अर्थ अज्ञान से है। इसमें ज्ञान सही नहीं रहता। (2) अस्मिता से अर्थ अपनेआप से ज्यादा लगाव का होना है। यह … Continue reading पातंजल योग सूत्र, साधन पाद